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        गर्मी जाएगी अपने घर  

 
गरमी जायेगी अपने घर
ऋतु फिर नयी सुहानी होगी

बादल बरसेगा ही जमकर
धरती फिर से धानी होगी

कल्ले फूटेंगे टहनी में
चिड़ियों की शैतानी होगी

आयेंगे त्योहारों के दिन
पाहुन की अगवानी होगी

अपनी अल्प निजामत के ही
हम राजा वो रानी होंगी

- उदय शंकर सिंह 'उदय'
१ जुलाई २०२६

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