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        गर्मी भरे मौसम में
                        (कुंडलिया)

 
१
गर्मी भरे मौसम में, हुआ स्वास्थ कुछ मंद।
वातानुकुलित कक्ष में, सारी खिड़की बंद।।
सारी खिड़की बंद, वायु निर्मल नहि मिलती।
टहलें सायं रोज, खुशी की कलियाँ खिलती।।
करें योग व्यायाम, तभी तन मन में नरमी।
वैश्विक तापवृद्धि, बिगाड़े सबकी गर्मी।।

२
गर्मी गर्मी कह रहे, सर्दी पूछे मोल।
आना जाना है नियम , मौसम के है बोल।।
मौसम के है बोल, खौलता दिनकर आया।
जीवन है अनमोल, बचा लो अपनी काया।
छुट्टी बीते रोज, बच्चों पर रखो नरमी।
खाओ लीची, आम, कहो वाह वाह गर्मी।।

३
गर्मी में पर्वत सदा, सैलानी की शान।
चादर ओढ़े बर्फ की, खड़ा है सीना तान।।
खड़ा है सीना तान, झील अरु झरनों वाला।
गर्मी में पर्यटन, बड़ा ही मन मतवाला।।
ना करना अति क्रोध, स्वभाव में रखो नरमी।
चलो घूमने पर्वत, पर कहती है गर्मी।।

- रश्मि सिंह
१ जुलाई २०२६

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