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        बौराया दिनमान

 

सूरज-दीवानी हुई धूप बढ़ाकर ताप
बहा पसीना ले गया मेक'प अपने आप
.
मँहगाई के ताप से हर गृहणी बेज़ार
हाथ-पाँव ठंडे हुए गृहपति चुप लाचार
.
जन प्रतिनिधि पैदल चलें राजमार्ग पर रोज
जंगल कटने का असर क्या समझें बिन खोज
.
गरमी से हैरान है प्रतिमा बनकर दैव
ठठा निशाचर हँस कहें ऐसे रहें सदैव
.
रक्षित को लू भी लगे मादक मंद बयार
अन आरक्षित जल रहा सही न जाए मार
.
ट्रंप पुतिन जिन पिंग को सूरज ग्रह पर भेज
विश्व शांति संभावना हो पाएगी तेज
.
बंद रहे संसद भवन जमे रोज चौपाल
सांसद बैठें धूप में जन का समझें हाल
.
करते पेपर लीक जो उचित सजा है एक
सुबह-शाम तक मुफ्त में सहें धूप की सेक
.
आम आम का पन्हा पी करता गरमी शांत
खास बोतलें थामकर रहते सदा अशांत

- संजीव वर्मा सलिल
१ जुलाई २०२६

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