QaUp ko paMva

 

ga`IYma : tIna kuMDilayaaM 

—Saas~I ina%yagaaopala kTaro 

 

ga`IYma ?tu maoM saUya- ka [tnaa pD,a p`Baava
ZkI ZkI rhnao lagaI gaaorI isar sao paMva
gaaorI isar sao paMva inaklanao maoM SarmaatI
baD,o jatna sao Apnaa ek ek AMga CupatI
AaMKaoM pr caSmaa caohro pr ksaa dupT\Ta
skUTI pr calaI kaOnaĆ saba h@ka va@ka..
000

jaOsao–jaOsao ga`IYma nao gajaba psaaro pOr.
jalacar‚ qalacar‚ vaayaucar nahIM iksaI kI KOr..
nahIM iksaI kI KOr rat–idna rho Jaulasato‚
nadI nahr Jarnao kuC tao raht do sakto hO‚
maaOsama kI Ba{I maoM tpa doh inaKra hO‚
jaOsao tpkr KUba inaKrta svaNa- Kra hO..
000

gamaI- sao vyaakula hue Gar sao Aakr tMga
dUr nadI maOM kUdto baccao naMga QaD,Mga..
baccao naMga QaDM,ga dor tk KUba nahato
panaI ibanau saba saUna ]i@t cairtaqa- krato
jaana gayao saba poD, taD ko KalaI KalaI
@yaa haotI hO hrI naIma vaao Cayaa vaalaI..

16 jaUna 2005

 

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। कविकाव्य चर्चा काव्य संगम किशोर कोना गौरव ग्राम गौरवग्रंथ दोहे रचनाएँ भेजें
नई हवा
पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।