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गाँव में अलाव
जाड़े की कविताओं को संकलन

गाँव में अलाव संकलन

दो बूँद


शरद का सुन्दर नीला आकाश
निशा निखरी था निर्मल हास

बह रही छाया पथ में स्वच्छ
सुधा सरिता लेती उच्छवास।

पुलक कर लगी देखने धरा
प्रकृति भी सकी न आँखे मूँद

सुशीतलकारी शशि आया
सुधा की मनो बडी-सी बूँद।

हरित किसलय कोमल वृक्ष
झुक रहा जिसका पाकर भार

उसी पर रे मतवाले मधुप!
बैठकर करता तू गुंजार!

न आशा कर तू अरे! अधीर
कुसुम रज रस ले लूँगा गूँद

फूल है नन्हा सा नादान
भरा मकरन्द एक ही बूँद।

- जय शंकर प्रसाद

(झरना से)

    
 

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