अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

 

होली है!!


नभ तक उड़े गुलाल


नभ तक उड़े गुलाल सजीली मथुरा में
वासंती ब्रज धाम छबीली मथुरा में

हुरियारों की भीड़ मचे जब
सबके माथे पाग सजे जब
झर झर बरसे रंग केसरी
पाँवों में पाजेब बजे जब

कहीं लाठियाँ हाथ कहीं पर
ग्वाले ताने ढाल
रंगीली मथुरा में
 

गली गली में फाग टोलियाँ
गाली रसिया रार झिड़कियाँ
सूरदास के रचे पदों को
डूब गा रही गान गोपियाँ

बरसे मधुर धमार रात भर
भीगें ब्रज के ग्वाल
सुरीली मथुरा में
 

बरसाना नंदगाँव गोवर्धन
किसको भूल सके वृंदावन
जहाँ बहें दधि दूध की नदियाँ
जहाँ बिलोएँ सखियाँ माखन

छप्पन भोग छकें मनमोहन
बँटे प्रसाद के थाल
रसीली मथुरा में

-पूर्णिमा वर्मन
१७ मार्च २०१४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter