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सखे दिन होरी के

सुनहरी सुबह, रुपहली धूप
सुरमयी साँझ निखारे रूप
सखे, दिन होरी के

कहीं पर चहचर, फाग, धमार
कोई बरसाये रंग गुलाल
रंगी या कोरी के
सखे, दिन होरी के

छेड़कर अ-र-र-र कहें कबीर
लगाएँ मल-मल रंग अबीर
साँवरी गोरी के
सखे, दिन होरी के

स-र-र-सर टेसू रंग बौछार
गाँव, घर, गलियाँ औ' चौबार
रंगे रंग होरी के
सखे, दिन होरी के

- अनिल कुमार वर्मा
१ मार्च २०२०

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