अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

   
 

      
       मन फागुन फागुन

रंग देना तुम ऐसे रंग में
मन फागुन फागुन
हो जाए

टेसू का रंग पीत ख़ुशी का
हर सिंगार पिया मनभावन
लाल-गुलाबी, अनुरागी रंग
अधरों पर हों गीत सुहावन
लिख देना प्रिय, गीत प्रणय का
मन श्यामा-मधुवन
हो जाए  

नैनो की चितवन को रंगना
धरा-गगन सा मौन  समर्पण
होली की मदभरी साँझ में  
नव रंगों से रंजित आँगन
रंगो की घन-घटा रंगीली
मधु-रस मय सावन
हो जाए 

- पद्मा मिश्रा
१ मार्च २०२३
   

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter