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होली में
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कुसुम धानी चुनर केसर धरा का रंग होली में
सुमन मन में खिले मौसम ने बदला रंग होली में

सजे बाजार गाँवों में मची है धूम होली की
हवा भी कह रही किसने लगाया रंग होली में

कभी दिल्ली कभी बाम्बे कभी गुजरात जाते हो
तुम्हारे बिन मजा देगा भला क्या रंग होली में

चले आओ बुलाते हैं ये आँगन खेत फागुन में
जो मिलकर साथ खेलेंगे जमेगा रंग होली में

खुशी ढूँढे है पापा को नहीं छूती है पिचकारी
इधर गुड्डू नहीं खेलेगा अबकी रंग होली में
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- नीरज नीर
१ मार्च २०२६

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