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वही त्योहार होली है
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सभी से सब गले मिल लें वही त्योहार होली है
करे जो रंग को पक्का वही तो प्यार होली है

शिकायत हो नहीं कोई न शिकवों से भरा हो मन
रहे जो सिर्फ अपनापन वही संसार होली है

मिली है तान मुरली की जुटे हों गोप गोकुल में
सुदामा संग नटवर का बड़ा आधार होली है

नहीं रुकती नहीं थकती नहीं वह द्वेष है रखती
निरंतर जो बहे आगे वही रफ़्तार होली है

कहीं देवर कहीं भाभी कहीं जीजा कहीं साली
रहे जो साथ मर्यादा वही तकरार होली है

दहीपूरी शकरपारे कहीं गुझिया है प्लेटों में
इसी पकवान में रस है यही रसधार होली है

नई दुनिया नई तकनीक नए हैं रंग आभासी
बिना भीगे एआई की हुई बौछार होली है
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- ऋता शेखर 'मधु' 
१ मार्च २०२६

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