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      मन रंग जाए
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रंग पाओ तो मन को रंग दो
मन रंगीला हो जाए
मन के रंग ही सच्चे रंग हैं
बाकी सारे रंग धुल जाए

मन पर सद्भावों का रंग हो
तन पे लाल-गुलाल सजाएँ
हँसी-ठिठोली संग में लूटें
पल भर चमके पल में छूटे
धूप लगे या पानी बरसे
रंग तन से धुल जाए
रंग पाओ तो मन को रंग दो
होली आई रंग बरसाए

मन को जो रंग प्रेम से रंगे
वो छूटे ना सारी उमरिया
नदिया धोए न आग जलाए
अमर रहे वह रंग तो रसिया
साँस-साँस में बस जाए जो
रंग कभी नहिं वो धुल पाए
रंग पाओ तो मन को रंग दो
होली आई रंग बरसाए

कान्हा-रंग में वृंदावन है
राधा मन ही मन आनंद है
आया फाग बजे मंजीरा
सारी नगरी ढोल कबीरा
मन मंदिर में रंग जले
तो जग सारा रंग जाए
रंग पाओ तो मन को रंग दो
होली आई रंग बरसाए

- मीरा ठाकुर  
१ मार्च २०२६

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