अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

 

                        .
                
      सुंदर रंगों में
  .
होली के सुन्दर रंगों में
आओ घुल-मिल जाएँ

फागुन की झोली में देखो
रंग भरें हैं खूब
साथ साथ जिनके महकी है
हरी-भरी सी दूब
मनभावन लगते चटकीले
आँगन में खिल जाएँ

गौरैया की उछल कूद में
देखो नयी उमंग
दाना चुगती कभी न थकती
जीत रही ज्यों जंग
पल भर भी वह शांत न रहती
मिलकर शोर मचाएँ

मुखड़े पर लगता आकर्षक
रंग गुलाबी लाल
नीले पीले और हरे भी
करते खूब कमाल
हर सुन्दर रमणी देखो अब
मन ही मन मुसकाएँ

पर्व सुहाना होली का है
आ जाता हर वर्ष
और जगा देता है मन में
स्नेह भावना हर्ष
सभी गुलाल लिये हाथों में
आओ कदम बढ़ाएँ

- सुरेन्द्रपाल वैद्य  
१ मार्च २०२६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter