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ज्योति पर्व
संकलन

 

मत हो हताश

 

जगमग जल दीपों का प्रकाश।
कहता, मानव! मत हो हताश।।

कैसी भी स्थिति हो बढ़े चलो,
हर बाधा से जी तोड़ लड़ो,
हो कभी न जीवन से निराश।।

दुनिया घनघोर अँधेरा है,
जीवन द्युतिमान सवेरा है,
मत आने दो तुम तिमिर पास।।

तुम पवन सदृश्य गतिमान रहो,
दीपक से ज्योतिर्मान रहो,
खंडित होने दो मत विश्वास।।

भू रुके , गगन झुक जाएगा
तुमको सब कुछ मिल जाएगा,
परिश्रम की टूटे नहीं श्वास।।

भूलो, कल जो कुछ हुआ, हुआ,
पाँसों से खेलो तुम न जुआ,
जर्जर होने दो नहीं आस।।

मन पर जिसने जय पा ली है,
उसको हर दिन दीवाली है,
'आदेश' कभी मत हो उदास।।

प्रो. हरिशंकर आदेश

 

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