अंजुमनउपहार कविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम
गौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजेंनई हवा पाठकनामा पुराने अंकसंकलन
हाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतरसमस्यापूर्ति

 


ज्योति पर्व
संकलन

जलते रहो तुम दीप मेरे

जलते रहो तुम दीप मेरे
जागृति की साध ले
सृष्टि की सौगात ले
सुर में ढ़ली आवाज़ ले
चलते रहो तुम दीप मेरे
जलते रहो तुम दीप मेरे

बाधा सभी तू काट दे
कर के प्रकाशित रास्ते
चित्त-वृत उन्नत करे
जय करो सौभाग्य मेरे
जलते रहो तुम दीप मेरे

कीर्ति ध्वजा लहरा सके
प्रतिपल प्रशस्ति ला सके
सफल यत्न सब पा सके
कर कृतार्थ सुर साज़ मेरे
जलते रहो तुम दीप मेरे

-रानी पात्रिक

 

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है।