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नमन कोदंडधारी को

 
जनम लेकर धरा पर
जो जगत को तारने आया
ऋषी मुनियों की रखवाली में
था वनवास अपनाया
बना जो धर्म का रक्षक
नमन उस धर्मचारी को
नमन कोदंडधारी को

समाजिक रीतियों से जो
कभी भी नहीं घबराया
निभाए वचन सबके ही
नहीं विद्वेष अपनाया
चुनी मर्यादाएँ जिसने
नमन उस संस्कारी को
नमन कोदंडधारी को

जो मंगल का भवन है औ'
अमंगल दूर करता है
शिलाओं में भी जीवन-
दानकर अमरत्व भरता है
जो हर मन के तमस हरता
नमन उस चमत्कारी को
नमन कोदंडधारी को

- पूर्णिमा वर्मन
१ अक्टूबर २०२५

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