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           कोहरे में

हो रहा - अनुपम सवेरा कोहरे में
रात का - उठ चला डेरा कोहरे में

चाँद सा सूरज उगा है
गगन शीतलता पगा है
धूप पर पहरा लगा है
धुँधलके में रतजगा है
भोर का - बिछता बसेरा कोहरे में
चल रहा - सबकुछ अबेरा कोहरे में

पारदर्शी ले रजाई
सुगबुगाती किरन आई
बाड़ को रंगने लगी है
प्रात में डूबी ललाई
शिशिर का - जादू घनेरा कोहरे में
काम पर - निकला कमेरा कोहरे में

धुँध में जो ढँक रहा है
सत्य से वह बच रहा है
डूबकर जो रच रहा है
जो कहा वह सच रहा है
लग रहा- फिर भी अनेरा कोहरे में
क्या पता- क्या हेरा फेरा कोहरे में

जगत माया से ढँका है
सदा से दो में बँटा है
कुछ तो जगमग से अटा है
कहीं अँधियारा सटा है
जोगिया सच- है चितेरा कोहरे में
कोई भी - तेरा न मेरा कोहरे में

- पूर्णिमा वर्मन

१ दिसंबर २०२१
     

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