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          सर्दियों का राज

गर्मियों के दिन गए अब
सर्दियों का राज

चल रही ठंडी हवाएँ
कँपकँपाती भोर
सूर्य ने ओढ़ी रजाई
है तमस घनघोर
लग रहा बदला हुआ सा
मौसमी अंदाज

हिम कणों सी दिख रही है
पत्तियों पर ओस
और ठंडा पड़ गया है
रश्मियों का जोश
धुंध धरने पर जो बैठी
रुक गए सब काज

दिन भी मुरझाया, लगा है
धुंध का प्रतिबंध
यामिनी भी बाँचती है
सर्दियों के छंद
साथ कोहरे के हुआ है
ठंड का आगाज

गर्मियों के दिन गए अब
सर्दियों का राज

- रमा प्रवीर वर्मा

१ दिसंबर २०२१
     

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