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       तीन कुंडलिया

 

१
गुरु के दर्शन
जीवन है आकाश सा, जिसमें लाखों रंग
इंद्रधनुष सी ओढ़नी, कढ़ी हुयी सतरंग
कढ़ी हुई सतरंग,दिखे छवि निर्मल-उज्जवल
खिलें हज़ारों पुष्प, विहंगम सागर सु कमल
ऐसा अद्भुत दृश्य, मिले जब गुरु का दर्शन
कहें जिज्ञासा प्रेम, भरा हो सुंदर जीवन

२
रामदुलारी
रामदुलारी आ गईं, खाए मुख भर पान 
घर-घर बर्तन माँजती, सिर पर धरे जहान 
सिर पर धरे जहान, तीन घर अभी काम है 
चाहे थोड़ी चाय, दर्द सिर में तमाम है 
जिज्ञासा कहें सुनो, तनिक सुस्ता लो प्यारी 
जान रहे पर, काम, अरी ओ रामदुलारी
 
३
रैन बसेरा
रैन बसेरा सज गया, चौराहों की ओट 
कोई पहनें जैकेटें, कोई पहने कोट 
कोई पहने कोट, दुशाला ओढ़े कोई 
कितनी गहरी नींद, शबाना-सीमा सोई 
देख जिज्ञासा आज, नैन को आया चैन 
सच बर्फीली हवा, दर्द देती दिन रैन 

- जिज्ञासा सिंह
१ फरवरी २०२६

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