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       तीन कुंडलिया

 

१
जंगल
जंगल देते हैं हमें, प्राण वायु फल फूल
कभी काटने की नहीं, करना कोई भूल
करना कोई भूल, हमें यह औषधि देते
पौधे गुण की खान, नहीं कुछ हमसे लेते
चलो लगाएँ वृक्ष, करें यह कार्य सुमंगल
पशु-पक्षी खुशहाल, तभी जब होंगे जंगल

२
नेता की बात
नेता की तू बात पर, करना मत विश्वास
वादा करके आज वो, तोड़ेगा कल आस
तोड़ेगा कल आस, बड़ी बातें बोलेगा
लेकिन जीत चुनाव, वायदे सब तोड़ेगा
मुख से अपने नाम, सदा गाँधी का लेता
लेकिन उलटे काम, हमेशा करता नेता

३
जादू निगाह
ऐसा जादू कर गयी, तेरी एक निगाह
अपना रस्ता छोड़कर, पकड़ी तेरी राह
पकड़ी तेरी राह, चाह मिलने की जागी
भूल स्वयं को चित्त, हुआ तेरा अनुरागी
सखियों के सँग मेल, नहीं अब पहले जैसा
सब पूछें व्यवहार, हुआ क्यों तेरा ऐसा

- नीता अवस्थी
१ फरवरी २०२६

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