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       तीन कुंडलिया

 

१
भारत महान
सारे जग मे हो रहा, भारत का गुणगान
शुभ संस्कारी भावना, है इसकी पहचान
है इसकी पहचान, सभ्यता बड़ी निराली
सर्व धर्म सत्कार, बनाता गौरवशाली
कहे सुधा सुन मीत, लगा लो तुम भी नारे
भारत देश महान, कह रहे जग में सारे

२
हार
हार करें स्वीकार जो, होते नहीं निराश
सतत परिश्रम कर सदा, मन में रखते आस
मन में रखते आस, नहीं बाधा से डरते
गिरकर उठते रोज, कभी ना मन से थकते
कहे सुधा निज बात, को समझे दुनियादार
छुपी हार में जीत, हम हार करें स्वीकार


३
विचलित
विचलित गर मन हो रहा, कर लें प्राणायाम
साधें श्वास-प्रश्वास निज, मिले सुखद आराम
मिले सुखद आराम, धैर्य मन में है आता
मिटे बिचार विकार, भाव निर्मल हो जाता
कहे सुधा सुन मीत, श्वास साधें जो नियमित
मन में रखते धैर्य, कभी ना होते बिचलित

- सुधा देवरानी
१ फरवरी २०२६

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