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       तीन कुंडलिया

 

१
ठंड का जोर
घोर घटाएं छा गई, नभ पर चारों ओर
और बढ़ाती जा रही, कड़ी ठंड का जोर
कड़ी ठंड का जोर, मगर सब-कुछ सहना है
गर्म पेय के साथ, मस्त मिलजुल रहना है
कहते वैद्य सुरेन्द्र, नहीं बिल्कुल घबराएं
सर्द महीना माघ, साथ हैं घोर घटाएं

२
हिंदी भाषा
हिंदी के संसार का, कोई आर न पार
दुनिया के हर छोर तक, इसका है विस्तार
इसका है विस्तार, बनी सबकी प्रिय भाषा
पूर्ण कर रही नित्य, अधूरी हर अभिलाषा
कहते वैद्य सुरेन्द्र, नदी गंगा कालिंदी
सरस्वती के संग, प्रवाहित भाषा हिंदी

३
समय का ध्यान
जीवन यह अनमोल है, खूब कीजिए प्यार
और सभी को दीजिए, यह सुन्दर उपहार
यह सुन्दर उपहार, सभी का साथ निभाएं
लिए मधुर मुस्कान, सुपथ पर बढ़ते जाएं
कहते वैद्य सुरेन्द्र, प्रफुल्लित होगा तन-मन
रखें समय का ध्यान, बनाएं सुरमय जीवन

- सुरेन्द्रपाल वैद्य
१ फरवरी २०२६

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