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        माघ मास के दिन

 
परम पावनी गंगा तट पर
बीते माघ मास के दिन
ठिठुराती जाडे की रातें
सिहराते हैं हर पल छिन

प्रात-काल का स्वर्णिम सूरज
रंगे माघ मास के दिन
सूरज की किरणो का उत्सव
रचते माघ मास के दिन

शीत भयंकर सिहराती तन
कंपित गात पात हैं उन्मन
उष्मा की तलाश में जीवन
जीते माघ मास के दिन

ओस भरी बिखरी हरीतिमा
फूल फूल सोया मौसम
भोर तले तुहिनों से बातें
करते माघ मास के दिन

- पद्मा मिश्रा
१ दिसंबर २०२५

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