अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

ममतामयी
विश्वजाल पर माँ को समर्पित कविताओं का संकलन 

 

 

 

माँ ! नहीं हो तुम

माँ ! नहीं हो तुम
कठिन है मुश्किलों का हल
अब बताओ किसे लाऊँ
फूल, गंगाजल
1
सफ़र से पहले दही-गुड़
होंठ पर रखती,
किन्तु घर के स्वाद कड़वे
सिर्फ़ तुम चखती,
राह में रखती हमारी
एक लोटा जल
1
सांझ को किस्से सुनाती
सुबह उठ कर गीत गाती ,
सगुन - असगुन पर्व - उत्सव
बिना पोथी के बताती ,
रोज पूजा में चढ़ाती
देवता को फल
1
तुम दरकते हुए
रिश्तों की नदी पर पुल बनाती
मौसमों का रुख समय से पूर्व
माँ तुम भाँप जाती ,
तुम्हीं से था माँ ! पिता के
बाजुओं में बल
1
मौन में तुम गीत चिड़ियों का
अंधेरे में दिया हो ,
माँ हमारे गीत का स्वर
और गज़ल का काफ़िया हो ,
आज भी यादें तुम्हारी
हैं मेरा संबल
1
--जयकृष्ण राय तुषार
१५ अकतूबर २०१२

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter