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भावना कुँअर की मुकरियाँ

 

१.
आँख मिचौली मैं तो खेलूँ
जब चलो मैं साथ में हो लूँ
इक माँ की हैं दोनों जाई
क्या सखि बहना? ना परछाई

२.
रंगों को आती बिखराती
सबके मन को है हर्षाती
नीयत सबकी इस पर फिसली
क्या सखि होली? ना सखि तितली

३.
जब मैं चलती तब ही चलता
कभी दौड़ता कभी टहलता
मेरे तो मन को है छूता
क्या सखि कुत्ता? ना सखि जूता

४.
मनोरंजन व ज्ञान बढ़ाए
सबकी ये आँखें बन जाए
देखें बच्चे, बूढ़े, बीवी
क्या सखि दर्पण? ना सखि टी०वी०

५.
प्रेम मिले तो ये मुस्काते
विरह मिले तो हैं मुरझाते
संग रहे हैं दिन औ रैना
क्या सखि गुलशन? ना सखि नैना

६.
देखूँ उसको मन खिल जाए
ख़ुशबू से मुझको महकाए
देख न पाऊँ सूरत झुलसी
क्या सखि क्यारी? ना सखि तुलसी

७.
सब इसको काँधे पे लेते
इज़्ज़त मान सभी हैं देते
बिकता है ये महँगा, सस्ता
क्या सखि हीरो? ना सखि बस्ता

- डॉ० भावना कुँअर
१ अगस्त २०२६

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