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ज्ञानवती दीक्षित की मुकरियाँ

 

१
बिन कारण वह गुस्सा खाए
पल में रोवे, पल मुस्काए
काम करावे दिन और रात
ऐ सखि साजन? ना सखि सास

२
तन का लंबा, मन का सीधा
सुर में बोले, हर ले पीड़ा
तान सुनावे लेकर साँस
क्यों सखि साजन? ना सखि बाँस

३
रात में आवे, कान में गावै
रक्त चूसकर मुख सुजवावै
फिर भी चैन न, एको अच्छर
क्यों सखि साजन, न सखि मच्छर

४
मुख में जाते रस बरसावे,
फीकी चाय में जान ले आवे
ज्यादा हो तो, रोग बढ़ावै,
क्यों सखि साजन? ना सखि शक्कर
५
कागज पर अपना रूप दिखावै
अज्ञानी को ज्ञान सिखावै
मिटै न मिटाए शब्द का चक्कर
क्यों सखि साजन? ना सखि अक्षर

- ज्ञानवती दीक्षित
१ अगस्त २०२६

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