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      डॉ मधु प्रधान की मुकरियाँ

 

१
उसके साथ चाय भी भाए
सारे जग का हाल बताए
मुझको उससे हो गया प्यार
क्या सखि साजन? ना अखबार

२
उसके बिन कुछ भी ना भाये
मिले नहीं तो कल न आये
याद दिलाये हमको नानी
क्या सखि साजन? न सखि पानी

३
रूप सजीला मुझको भाये
हार गले का वह बन जाये
वह मेरे मन की है ज्योती
क्या सखि साजन?न सखि मोती

४
वह आये तो मन लहराये
श्यामल-श्यामल छवि मन भाये
जैसे हो नयनों का काजल
क्या सखि साजन ?न सखि बादल

५
आना-जाना सरल बनाये
दुनिया भर की सैर कराये
उसके बिन सब कुछ बेकार
क्या सखि साजन? न सखि कार

- मधु प्रधान
१ अगस्त २०२६

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