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मीरा ठाकुर की मुकरियाँ

 

१
पलकों पर आकर रुक जाए?
मन की हर धड़कन पढ़ जाए
सुख-दुख का बन जाए राज़—
क्या सखि साजन? नहीं सखि? ख़्वाब

२
राह कठिन हो? साथ निभाए?
गिरते मन को पुनः उठाए
जीवन भर देता है ताकत
क्या सखि साजन? नहीं सखि? हिम्मत
३
मन की सारी गाँठें खोले?
मीठे-मीठे बोल ही बोले
हर पल रखे हृदय के पास—
क्या सखि साजन? नहीं विश्वास
४
अँधियारे में राह दिखाए?
हर संकट में काम भी आए
बिन उसके सब लगे अजान—
क्या सखि साजन? नहीं सखि ज्ञान
५
कभी रुलाए कभी हँसाए
बीते पल फिर याद दिलाए
जीवन का अनमोल हिसाब—
क्या सखि साजन? नहीं सखि याद

- मीरा ठाकुर
१ अगस्त २०२६

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