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निशा कोठारी की मुकरियाँ

 

१
पोर उँगलियों के सहलाये
अधरों के कम्पन भी पाये
श्वासों से ले सरस माधुरी
का सखि साजन? नहीं बाँसुरी

२
तरह तरह के उसके रंग
प्रेम प्रदर्शन उसके संग
बढ़ जाती आँखों की आब
क्या सखि साजन? नहीं गुलाब

३
टिका हुआ है उस पर जीवन
वही सम्भाले रखता है मन
छोड़ न उसे है ये ताकीद
क्या सखि साजन? नहीं उम्मीद

४
उसे देख कट जाता है दिन
लगे अधूरा घर उसके बिन
दूर करे मन का सूनापन
क्या सखि साजन?न टेलीविज़न

५
उसके बिना जिया घबराये
रोम रोम मानो जल जाये
उससे ही मिलता है चैन
क्या सखि साजन? नहीं सखि फैन

६
उसके बिन शृंगार अधूरा
वो नारी को करता पूरा
उसके बिन मुश्किल है जीना
क्या सखि साजन? नहि आईना

७
मुझे हमेशा ही बहलाता
उसमें मेरा मन रम जाता
मेरी उसकी गहरी प्रीत
क्या सखि साजन? नहिं सखि गीत

८
कभी रिझाये कभी खिजाये
पल पल रंग बदलता जाये
कभी तपे तो कभी झमाझम
क्या सखि साजन? ना सखि मौसम

- निशा कोठारी
१ अगस्त २०२६

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