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पवन सिंह बैश की मुकरियाँ

 

१
गुनगुन गीत कान में गाये
सोते से वह मुझे जगाये
धुन में पढ़े प्रेम के अक्षर
क्या सखि साजन? ना सखि मच्छर

२
उसके बिना नहीं जिंदगानी
ना तेरी ना मेरी कहानी
दुनिया भी उस बिन वीरानी
क्या सखि साजन? ना सखि पानी

३
हर पल लगे मुझे वो अपना
भांति भांति की करूं कल्पना
रोज देखते मेरे नयना
क्या सखि साजन?
ना सखि सपना

४
जैसे ही वो घर में आए
उसे देख मन खुश हो जाए
रातें मेरी उजली-उजली
ऐ सखि साजन? ना सखि बिजली

५
जब भी वो मुझको मिल जाए
उसे देख मन खुश हो जाए
चेहरे पर होती स्माईल
ऐ सखि साजन? नहिं मोबाइल

६
उससे मेरा गहरा नाता
वो आता मन खुश हो जाता
उसके बिना रहूँ मैं दुखिया
ऐ सखि साजन? ना सखि रुपिया

७
मुझको मन की बात बताता
वो आता मन खुश हो जाता
हर पल करती उसका वेट
ऐ सखि साजन? नहिं री नेट!

- पवन सिंह बैश
१ अगस्त २०२६

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