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सौरभ पाण्डेय की मुकरियाँ

 

१
आना-जाना, होना तय है
फिर भी मनमाना अभिनय है
कर दे सुखमन या फिर बेदम
का सखि साजन? ना सखि मौसम
२
साथ न हो तो मन में छटपट
संग न नटखट तो सब अटपट
रंग-रूप-गुण पर मैं काइल
का सखि साजन? ना मोबाइल
३
खुश रखता है मन को भाता
एक अलग संसार सजाता
मुझे समझ उसकी परजीवी
का सखि साजन? ना वह टीवी
४
ताड़े तौले औ’ तड़पाये
मीठी बातों से भरमाये
मन की कह खुद कान न देता
का सखि साजन? ना सखि नेता
५
हुआ अँधेरा आता झटपट
छिपना चाहे सुनते आहट
दिखते ही सिहरा दे जट्टा
का सखि साजन? ना तिलचट्टा
६
दिन ढलते वह चूमे-चाटे
तन सिहरा दे, चिकुटी काटे
छेड़े और सताये खुल कर
का सखी साजन? ना सखि मच्छर

- सौरभ पाण्डेय
१ अगस्त २०२६

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