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स्मृति गुप्ता की मुकरियाँ

 

१
राह दिखा कर विपदा हरता
जीवन से तम दूर भगाता
खुशियां दर पर देती दस्तक
ए सखि साजन? ना सखि पुस्तक

२
हाथ लगे तो फिर ना छूटे
मान? सम्पदा सब कुछ लूटे
छुड़वा दे वो अपना गाँव
ए सखि साजन? ना सखि दाँव

३
हरी हरी लहराती जाए
बचपन के दिन याद दिलाए
चाहें सब पर हाथ न आई
ए सखि बयार? नहीं छुईमुई

४
लुक छिप कर वो खेला करती
बदली की है नेक सहेली
प्रेम हृदय में भरे रौशनी
ए सखि साजन? नहीं चाँदनी

५
बड़े बड़े सपनों में फाँसे
देता वह बातों के झाँसे
उसके हाथ तुरुप का पत्ता
ए सखि साजन? ना सखि सत्ता

- स्मृति गुप्ता
१ अगस्त २०२६

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