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सुशील शर्मा की मुकरियाँ

 

१
अंबर भर उजियारा करता
सारे तम को वह है हरता
ज्योति देता है खुद जलकर
क्या सखि साजन ? ना सखि दिनकर

२
डाल डाल पर गीत सुनाए
नील गगन में उड़ उड़ जाए
उड़ने में है वह वन दक्षी
हे सखि शेर? ना सखि पक्षी

३
हर पल मेरे साथ ही रहता।
मौन रहूँ तो मुझसे कहता।
जीवन के सुख का है मंतर।
हे सखि ईश्वर? ना सखि अंतर

४
बरखा धूप में देता संग
सिर पर डोले रंग बिरंग
सिर पर रहता बनकर त्राता
हे सखि रक्षक? ना सखि छाता

५
पीली चुनर धरा पहनाए
सूनी डाली फूल खिलाए
आया ऋतुओं का प्रिय कंत
हे सखि साजन? नहीं बसंत

६
सीपी के वह गर्भ में सनता
राजमुकुट की शोभा बनता
रत्नों में जिसकी है ज्योति
हे सखि मणिका? ना सखि मोती

७
शीतलता का प्यार लुटाए
रजनी को मधुमयी बनाए
नभ का है वह रजत परिंदा
हे सखि तारा? ना सखि चंदा

८
आँख मूँदने पर आ जाए
जागूँ तो फिर वह छिप जाए
सोचूँ तो लगता है अपना
हे सखि साजन? ना सखि सपना

९
घर आँगन में हँसी बिखेरे
उसके पल छिन प्राण है मेरे
माँ की गोदी में वह लेटी
हे सखि लक्ष्मी? ना सखि बेटी

१०
तन मन में शीतलता भर दे
सारी चिंताओं को हर दे
मंद चले बन प्राण अधीरा
हे सखि साजन? नहीं समीरा

- सुशील शर्मा
१ अगस्त २०२६

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