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 चलो गुलदस्ता दे दें
 
 
नये साल ने
ग्रहण किया पदभार
चलो गुलदस्ता दे दें

सपन हमारे
अर्जी ले अब
इसके पास ही जाएँगे
रूठ गया यदि यही
तो फिर
वे किससे आस लगाएँगे

क्या मालूम
इसी के पग
हम सबको इच्छित रस्ता दे दें

सुना
बहुत कुछ लेकर
इसके दिवस-महीने आए हैं
पिछले वालों से
हम सब ने
वचन अधूरे पाए हैं

माँगें चलकर इनसे भी
हो सकता
पूरा, सस्ता दे दें

नयी हवा से
कदम मिलाने
हमें निखरते जाना है
बीते को
इतिहास को देकर
वर्तमान को गाना है

कर्मों के कंधों को
नवता का
प्यारा सा बस्ता दे दें

- कुमार गौरव अजीतेन्दु 
१ जनवरी २०१८

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