अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

        नया साल गुलजार हो

 

विदा करें इस बरस को, भुला कटुक अघात
नया साल गुलजार हो, देकर कल को मात

बीता तो भूले नहीं, अंदर गहरा पैठ
सार्थक कुछ नववर्ष में, सोचें मिलकर बैठ

बहुत कष्ट हैं सह लिए, अब तो शुभ शुभ होय
जगत सभी खुशहाल हो, रहे उदास न कोय

आगत का स्वागत करें, भूल विगत की बात
शुभ मंगलमय रश्मियाँ, लाएँ नूतन प्रात

मंगलमय जग हो सदा, सकल कुशल सब होय
मुख हरषे मुस्कान से, अब न कोइ कुछ खोय

- रेखा श्रीवास्तव
१ जनवरी २०२१

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter