अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

         नया है साल

 
नया है साल अपने साथ खुशियाँ चाव लाएगा
पकड़ उम्मीद का दामन, यही बदलाव लाएगा

नये सपने इरादे कोशिशें रस्तों से मंजिल है
ये ताजा साल का मिसरा ही अब फैलाव लाएगा

भटककर थक गये थे जो उन्हें सुनकर तसल्ली है
नजूमी कह रहा था साल ये ठहराव लाएगा

जो कल पत्ते व शाखाएँ परस्पर थे उलझते, अब
पवन का हर मधुर झोंका पुनः सद्भाव लाएगा

रहा उस पर भरोसा है रहेगा भी हमेशा, 'रीत'
वो माँझी एक दिन साहिल पे अपनी नाव लाएगा

- परमजीत कौर 'रीत
१ जनवरी २०२२

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter