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          नये वर्ष में

 
१
भोर सिंदूरी
नव वर्ष के माथे
तिलक करे
२
अवनी तल
फैले ज्ञान -आलोक
नए वर्ष में
३
भोर के काँधे
नवल वर्ष चढ़
आए जग में
४
प्रेम का दीप
जले हर आँगन
मिटे विषाद
५
नूतन वर्ष
पावन उत्सव- सा
उतरे द्वार

- कृष्णा वर्मा
१ जनवरी २०२५

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