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         नये साल के दोहे

 
विपदा से हारा नहीं झेला उसे सहर्ष
तूफानों को पार कर पहुँचा है नव वर्ष

नभ धरती सागर सभी करें कृपा करतार
जंग और आतंक की पड़े कभी ना मार

बागों में खिलते रहें इंद्रधनुष के रंग
घर-घर में बसता रहे खुशियों का मकरंद

मन में हो संवेदना तन में नव स्फूर्ति
अपनों में सदभावना जग में सुंदर कीर्ति

उन्नति का परचम उड़े ऐसा करें विकास
संस्कार की नींव पर जमा रहे विश्वास

साल नया गुलजार हो मिटें सभी के दर्द
मेहनत से हम झाड़ दें गए साल की गर्द

अभिनंदन नव वर्ष का मंगलमय हो साल
ऋद्धि सिद्धि सुख संपदा सबसे रहें निहाल

- पूर्णिमा वर्मन
१ जनवरी २०२५

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