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         आलोकित हो नया साल

 
समय कभी भी थमा नहीं, सदियाँ बीती बीते हैं पल
सुख-दुख लेकर अपने अंदर, साल और
इक बीता कल

मंगलमय नए इस साल में, स्नेह प्यार के हों उपहार
कटुता द्वेष निराशा नफ़रत, दूर हटा दे
मन का प्यार

नूतन वर्ष नई उम्मीदें, नव उल्लास नया कोलाहल
फैले नयी उषा की लाली, नव प्रभात
छलके छल-छल

आलोकित हो नया साल, सब स्वप्न सजाएँ नये-नये
पथ में एक भी काँटा न हो, सुख का
नर्म कालीन बिछे

नहीं आएँगे बादल ग़म के, आज सभी की फले दुआ
संजोएँ नव अभिलाषाएँ नया साल
अवतरित हुआ

- दीपिका जोशी संध्या
१ जनवरी २०२५

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