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        है नयी हवा

 
है नई हवा, नई सदा, नई तरंग
प्रेम गीत गा रही, ज़मीं
हवा के संग

बाग धान पेड़ सब, सजा रही जमीन
अंकुर जय का नया, उगा रही जमीन
फल नए मिले, नई मिले फसल उमंग
प्रेम गीत गा रही, ज़मीं
हवा के संग

पीर ना रहे कहीं, रहे अजय ये तीर
भारती विजय रहे, करें सलाम वीर
और भी बढे चले, सपन यहीं तिरंग
प्रेम गीत गा रही, ज़मीं
हवा के संग

द्वेष, भेद भाव छोड़, हो नवीन प्रीत
जात पात हाथ छोड़, खत्म हो कुरीत
प्रेम की हवा चले, उडे नई पतंग
प्रेम गीत गा रही, ज़मीं
हवा के संग

- गोविंद सैनी आरिन
१ जनवरी २०२५

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