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         आया है नूतन वर्ष

 
आया है नूतन वर्ष सखे

कितनी अतीत की संस्मृतियाँ
कितनी भावी अभिलाषाएँ
आया है लेकर वर्ष नया
कितनी नव जीवन आशाएँ
नव युग के नव संदेशों का स्वागत है आज सहर्ष सखे
आया है नूतन वर्ष सखे

नयनो में नव उत्साह लिए
नंगों भिखमंगो की होली
शोषक जग के प्रति बोल रही
कुछ कुछ परिवर्तन-सी बोली
मानव जीवन है परिवर्तन परिवर्तन है उत्कर्ष सखे
आया है नूतन वर्ष सखे

इस नए वर्ष के साथ-साथ
कुछ-कुछ अशांत क्रंदन ध्वनि-सी
रह-रह कर कानों में गूँज रही
हाहाकारों की प्रतिध्वनि-सी
ऐसा लगता होना है कुछ जीवन में नव संघर्ष सखे
आया है नूतन वर्ष सखे

- कृष्ण मोहन
१ जनवरी २०२५

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