अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

शुभकामना
(नव वर्ष के अवस पर चोका में)

 
सुमन बन
खिले रंग प्रत्यंग
प्रसारित हो
सुन्दर मकरंद
सुगन्धित हो
नभ तक निर्बन्ध
अचर -चर
सभी रहें सानन्द
पवन अब
गाये कोमल राग
हँसे नभ भी
पाकर अनुराग
जगे जग में
शुभ निश्छलभाव
सभी उर में
उमंग शुभ भाव
अवनि पर
गूँजे मंगल गान
एक लय में
मधुरिम हो तान
सर्जना में हो
दिव्यानन्द रचा दे
सात्विकता के छन्द!

- मिथिलेश दीक्षित
१ जनवरी २०२६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter