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      नये वर्ष की ओर

 

हो गत विगत नवागत आगत
हे नव वर्ष तुम्हारा
स्वागत

पिछली भूलों से सीखें हम
कुछ तो मानव से दीखें हम
भाव प्रेम हर ह्रदय उदय हो
कुछ ऐसा कर दो
नव आगत

भारत भू फिर विश्व गुरु हो
निज स्वरूप पहचान शुरू हो
हम हैं राम -कृष्ण के वंशज
हम में अब भी
अंश तथागत

कसे मूल्य का ताना -बाना
नैतिकता की चादर लाना
ढकें नग्न अभिलाषाओं को
प्राप्त करें प्रेम
शरणागत

- निशेष जार
१ जनवरी २०२६

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