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स्वागत है नववर्ष तुम्हारा

 

स्वागत है नववर्ष तुम्हारा
इक दूजे का
बने सहारा

हम ऊँचें शिखरों तक जाएँ
अब तक नहीं मिला वह पाएँ
सृजनकर्म हो

आओ नूतन ज्योति जलायें
भीतर का तम दूर भगायें
ऐसा हम करके दिखलायें
चमके भारत
बनकर तारा

खुशहाली की लिए चाह हम
प्रगति पथ पर कदम बढ़ायें
द्वेष घृणा आपस में ना हो
फैलायें सब
भाईचारा

आओ लें संकल्प नया हम
फूले-फले विश्व यह सारा
हर दिन हर पल में यह गूँजे-
हर दिशि यह
संकल्प हमारा

- सुरेन्द् कुमार शर्मा
१ जनवरी २०२६

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