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नव वर्ष अभिनंदन
2007

दस्तक दे रहा है

         

दस्तक दे रहा है नया साल
और पुराना कह रहा है अलविदा

एक ओर जश्न की पूरी तैयारी है
टंकी भर ली है और
डिस्को बुक कर ली है
दूसरी ओर
किसान चढ़े हैं पानी की टंकी पर
ज़िंदगी को दाव पर लगाते
कर्ज़ माफ़ी की गुहार और
अपनी व्यथा से
सरकार को अवगत कराते

उधर टी.वी. पर भी
नए साल की पूरी तैयारी है
सब कुछ बेचने के बाद
अब अंतरंग संबंधों की बारी है

पति पत्नी को कितना और कैसे चाहता है
गोविंदा की तरह लोग
अपनी माँ से कितना प्यार करते हैं
नए साल की खुशी में
इसका लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा

नए साल में टी.वी. सीरियल
नए रूप में दिखाया जाएगा
और इसके माध्यम से
पारिवारिक संबंधों में गिरावट की
नई संभावनाओ को तलाशा जाएगा

रीतेश गुप्ता

  

नये साल को शत-शत वंदन

नये साल के
नये सूर्य का
शत-शत वंदन

घर-घर में
फैले उजियारा
बहे प्रेम की
अविरल धारा
राग-द्वेष
मिट जाय धरा से
रहे कहीं ना
रुदन-कंदन

सोन-चिरैयाँ
चह-चह चहके
दिग-दिगंत
घर-आँगन महके
दुख-दारिद्रय
मिटे अग-जग से
खुशियाँ करें
यहाँ पर नर्तन

पंख लगे
सबके सपनों को
नज़र लगे ना
चंदन वन को
सगुन बधावा
बाजे चहुँ दिश
सोन किरिन का
हो अभिनंदन

कृष्णानंद कृष्ण
1 जनवरी 2007

 

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