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नव वर्ष अभिनंदन
2007

 नया वर्ष शुचि मंगलमय हो

 

सदाचार युक्त हों नर-नारी
जनसेवक हों जन-हितकारी
क्लेशमुक्त हों अपढ़-अभागे
ज्ञानपिपासा जन में जागे
ऐसे दीपक जले चतुर्दिक
मानव मन का संशय क्षय हो
नया वर्ष शुचि मंगलमय हो।

वसन किसी का जीर्ण न होवे
बदन भूख से शीर्ण न होवे
जग में भ्रष्टाचार न होवे
छल मिश्रित व्यापार न होवे
शीलवान हों सभी नागरिक
सदा सत्य की पूर्ण विजय हो
नया वर्ष शुचि मंगलमय हो।

बचे एक भी कंठ न प्यासा
सबकी हो अवमुक्त हताशा
कोटि कल्पद्रुम हैं जनबल में
कल-कल से फूटे नव कल में
कर्मठता की जगे भावना
नहीं कहीं पर घटित अनय हो
नया वर्ष शुचि मंगलमय हो।

डॉ. गिरीश कुमार वर्मा

 

समय 'सन २००७'

मंद मध्यम तीव्र
चल रहा घोड़ा
समय का बलवान।
पीठ पर करते
हँसकर सवारी आप
चाहे ले चलिए जिधर
सरपट या चुपचाप।
इठलाता इतराता मौन
सुगंध और सौंदर्य से युक्त
समय का सुकोमल पुष्प।
सहज ही तोड़ कर
ले चलिए कहीं पर
ईश्वर प्रणय या
निज कर्म पथ पर।
हमेशा की तरह इस बार भी
ला रहा है सहेज कर
नव वर्ष आप सबके लिए
सुख समृद्धियों सफलताओं आशाओं और मंगल कामनाओं से
गुंथा हार 'सन २००७'

पवन कुमार शाक्य1

नया साल हो कमाल

नया साल हो कमाल
खूबसूरत और बेमिसाल
मिलें खुशियाँ और चैन
हँसे होठ खिलें नैन
ज़िंदगी रहे मुसकुराती
दीपों-सी झिलमिलाती
करें दुआ मिल के
अमन दुनिया में रहे।

रेणु आहूजा

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