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तुम्हारा स्वागत है नववर्ष
 

 

 

 

   

 





 

 


 




 

तुम्हारा स्वागत है नववर्ष

पारिजात शुभ गंध बिखेरे
नयनों फिर सपने तैरें
भूलें सब अवसाद भरे क्षण
खिले कुसुम महके नंदन वन
मिले फिर जन जन को उत्कर्ष
तुम्हारा स्वागत है नववर्ष

झूम झूम कर कोयल गाए
अमराई खिल खिल बौराए
सौरभ हर आँगन में उतरे
दर्पण दर्पण राधा सँवरे
धूम हो गली गली में हर्ष
तुम्हारा स्वागत है नववर्ष

ढोल मृदंग झाँझ डफ झनके
आँगन आँगन पायल छनके
दिन होली हो रात दिवाली
कभी न आए आँधी काली
न हो अब दुनिया में संघर्ष
तुम्हारा स्वागत है नववर्ष

डॉ. मधु प्रधान
३ जनवरी २०११

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