अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

नये वर्ष के संग
 

फलीभूत सब टोटके, फरकत बायें अंग
प्रियतम का आवन सुन्यो, नये वर्ष के संग

समय समय का फेर है, समय समय की बात
उनकी है खटिया खड़ी, इनका सुखद प्रभात

भ्रष्‍ट-तंत्र, आतंक, भय, मंहगाई की मार
नया साल शायद करे, इन सबसे उद्धार

लोकपाल चर्चा उतै, इत चुनाव संघर्ष
जनता खड़ी कबीर सी, ताके नूतन वर्ष

नये वर्ष में देखिये, कवि शायर भी व्यस्त
कोइ कहे ताजी ग़ज़ल, कोइ गीत में मस्त

अनिल वर्मा
३१ दिसंबर २०१२

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter