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नए वर्ष की चाल
 
नए वर्ष की चाल न पूछो
मेरे दिल का हाल न पूछो

बीते दिन की सूखी रोटी
आने वाली दाल न पूछो

गालों पर बेबसी का चाँटा
कितना हुआ मलाल न पूछो

आँसू भी निकले तो कैसे
हो न कहीं बवाल न पूछो

कैसे शर्म करे मंहगायी
मोटी चमड़ी खाल न पूछो

नए वर्ष के घर आने पर
कितने करूँ सवाल न पूछो

--कृष्ण कुमार तिवारी किशन
३१ दिसंबर २०१२

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