अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

बोलो क्या लेकर आओगे
 
नया साल
बोलो! क्या लेकर आओगे

मुरझाये
होंठों पर धूप खिलेगी क्या?
और अमावस को भी ज्योति
मिलेगी क्या?
गजल अदम की
बार-बार क्या गाओगे?

रिश्ते-नातों में
मिठास भर दोगे क्या?
बेघर लोगों को कोई
घर दोगे क्या?
भूखे की
आँखों की चमक बढ़ाओगे?

नया रंग
भर दोगे क्या अपनेपन में?
साँझा चूल्हा पुनः जलेगा
आँगन में?
बड़री आँखों में
सपने भर जाओगे?

- नचिकेता
२९ दिसंबर २०१४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter