अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

कोई नवगीत नहीं गाया
 
नव वर्ष तुम्हारे आने का
मतलब मैं समझ नहीं पाया
मित्रों को नहीं बधाई दी
कोई नवगीत नहीं गाया

हे दिवस-निशा के अमिट भाल
तुम तो अखंड हो पूर्णकाल
तुमको मैं कैसे व्यक्त करूँ
किस तिथि को कहाँ विभक्त करूँ?
तुझमें ही सब जीते-मरते
पर कोई समझ नहीं पाया

साहब को गुलदस्ते देना
बदले में कुछ कागज लेना
सतही विश करना काढ़ खीस
दो दस दे लेना एक बीस
थोथा जग का व्यापार मीत
मुझको यह कभी नहीं भाया

ढाई आखर का मैं फकीर
दादूनानकमीरा कबीर
दुनिया अपनी अलबेली है
विक्रम ही गंगू तेली है
मित्रो सद्अर्थ लगा लेना
कह गया हृदय में जो आया

- उमा प्रसाद लोधी
२९ दिसंबर २०१४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter